General hindi online test- Topic wise test -अविकारी शब्द

Share with your friends

                                                                   अविकारी शब्द

परिभाषा –  जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक, पुरुष व काल के द्वारा परिवर्तन नहीं किया जा सकता है मतलब जिनका रूप समान रहता हैं , उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं ।  उन्हें अविकारी शब्द भी कहते हैं ।
अविकारी शब्दों के भेद –

  1. क्रियाविशेषण
  2. संबंध बोधक अव्यय
  3. विस्मयबोधक अव्यय
  4. समुच्चयबोधक अव्यय 
  5. निपात ( मुख्य रूप से भेद 4 ही हैं ) 
          1.क्रिया विशेषण 
   परिभाषा 
         जो अव्यय शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं उन्हें क्रिया विशेषण कहते हैं | 
    जैसे-  राधा चुपके से चली गयी । श्याम यहाँ आओ। सीता सुबह आएगी । लता धीरे बोलती है ।
 क्रिया विशेषण के भेद चार भेद होते हैं –
  •  स्थान वाचक क्रियाविशेषण 
  • कालवाचक क्रियाविशेषण 
  • रीतिवाचक क्रियाविशेषण 
  • परिमाणवाचक क्रियाविशेषण
    (1) स्थानवाचक क्रियाविशेषण – 
                        जो अव्यय शब्द क्रिया के स्थान का बोध कराते हैं उन्हें स्थान वाचक क्रिया विशेषण कहते हैं । क्रिया शब्दों से पहले कहां शब्द लगाकर प्रश्न करने पर उत्तर के रूप में यही आते हैं जैसे-  पास दूर ,बाहर, भीतर, यहां-वहां,दायाँ , बायाँ, नीचे, ऊपर, इधर-उधर, सामने इत्यादि ।
   (2) कालवाचक क्रियाविशेषण – .
                       जो अव्यय शब्द क्रिया के समय का बोध कराते हैं उन्हें  काल वाचक क्रिया विशेषण कहते हैं । इसमें क्रिया शब्दों से पूर्व ‘कब’ शब्द लगाकर उत्तर प्राप्त किया जा सकता है ।
जैसे  – आज,कल, शीघ्र, सदा,अभी, तभी, जभी, पहले, सवेरे, दिन में, तत्काल,दिनभर, एकबार, अब, कब,जब ।




(3)  रीतिवाचक क्रियाविशेषण-  

                      जो अव्यय शब्द क्रिया की मात्रा या नाम  का बोध कराते हैं उन्हें रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं इसमें क्रिया शब्दों से पूर्व ‘कैसे’ शब्द लगाकर उत्तर प्राप्त किया जा सकता है । 
जैसे-  ऐसे, चुपचाप, धीरे, अचानक, अच्छी तरह,जरूर, सचमुच, शायद, इसलिए अब तक तेज नहीं कभी नहीं क्यों इत्यादि
4.-परिमाणवाचक क्रियाविशेषण
         जो अव्यय शब्द क्रिया की मात्रा या नापतोल का ज्ञान कराते हैं उन्हें परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं, क्रिया शब्दों से पहले ‘कितना’ शब्द लगाकर प्रश्न करने पर इसे प्राप्त किया जाता है
    जैसे थोड़ा, कम, तनिक, इतना, उतना

 2. संबंधबोधक अव्यय :
परिभाषा – जो अविकारी शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों विशेषकर क्रिया के साथ संबंध बताते हैं उन्हें संबंध बोधक अव्यय कहते हैं । 
जैसे का,की, के, मैं, पर, के, द्वारा,से द्वारा,इत्यादि । 
3. विस्मयादिबोधक अव्यय –
  परिभाषा – हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य, क्रोध इत्यादि भावों को प्रकट करने के लिए विस्मयादिबोधक अव्यय का प्रयोग किया जाता है ।  जैसे अरे वाह शाबाश है छि: आह इत्यादि ।
4. समुच्चयबोधक अव्यय-  
  जो अव्यय शब्द दो पदों या उपवाक्यों को जोड़ने के काम आते हैं उन्हें समुच्चयबोधक  अव्यय कहते हैं । 
जैसे – राम और श्याम बाजार चले गए ।
 राम गांव चला जाता है, परंतु उसके पिता ने मना कर दिया । 
 मुख्यत:  इसके पांच भेद हैं – 
  • संयोजक – और एवं, तथा ।
  • विभाजक अव्यय – अथवा, या
  • प्रतिषेधक अव्यय – पर, किंतु, मगर, बल्कि, लेकिन
  • निर्देशक अव्यय – अथार्थ , यानि ।
  • हेतुक अव्यय – फलस्वरुप, फलत:  इसलिए, क्योंकि । 
    निपात 
              परिभाषा जो अव्यय शब्द वाक्य में लगकर उसके किसी शब्द पर विशेष जोर या बल देते हैं तथा उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं या उसे सीमा में बांध देते हैं उन्हें निपात कहते हैं जैसे ही,भी, तो, तक, मात्र, भर इत्यादि ।




Share with your friends

Leave a Reply

Your email address will not be published.